Monday, June 19, 2017

झूठे ख़ाब

झूठे ख़ाब 


गुनगुनाने लगे, मुस्कूराने लगे
वो ख़ाब थे झूठे, समझाने लगे
आओ गले लग जाओ, सब छोड़ के,
मेरी रूह-ओ -जिस्म को, फुसलाने लगे

बहोत सी दूरियाँ, मुक़द्दर के खेल,
सुब्हो-शाम मुझे, डराने लगे

अजीब हरकतों का, मुझसे था वास्ता,
डगर-डगर क़दम, डगमगाने लगे

प्यार की ही थी, ताउम्र जुस्तजू ,
अपने-पराये हरपल, बहकाने लगे

हम ही थे उनकी, नज़रों के सामने,
मगर दिल के राबते, बेगाने लगे

देख के भी अनदेखा, फितरत थी उनकी,
दिल-ओ-जां  को "रत्ती", वो  जलाने लगे