Wednesday, June 18, 2008

दिल

दिल
जैसा भी है हमारा दिल ही तो है,
दिल ही तो है, बेचारा दिल ही तो है।
दिल पिघलने की चीज़ होती तो,
कब का पिघल गया होता,
ये तो शोला है, आग का गोला है,
ख़ुद जलता है, दूसरों को जलाता है,
बिना चिन्गारी के ही भड़क जाता है,
इतना ताप तो सूरज में भी नहीं,
ऐसा बर्फ का टुकडा़ देखा है कहीं,
क्या कहूँ ये तो भोला है, मासूम है,
कभी किसी से प्यार तो,

किसी से तक़रार करता है,
किसी ने ठेस लगायी तो,
अन्दर ही अन्दर सिसकीयाँ भरता है,
जैसा भी है, हमारा दिल ही तो है।
दिल ही तो है .....