Friday, September 4, 2009

अच्छा नहीं


अच्छा नहीं

मुझे बेवफा न समझो, ये अच्छा नहीं

सच तो आयेगा सामने, छुप सकता नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....


माना के हमसे कोई, ख़ता हुई होगी,

ज़रा सी चोट से कोई, मर सकता नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....


तुम मेरे हमसफर हो, मेरा भी तो हक़ है,

तुमको मैं छेड़ दूँ, तो कुछ घटता नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....


अगर ऐसी बात है तो, हम चुप ही बेहतर,

ये नोक-झोंक, गिला-शिकवा, अच्छा नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....


छोटी सी बात की, इतनी बड़ी सज़ा,

संगदिल भी रोता एक दिन, बचता नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....


यक़ीं कर लो हमारा, मुहब्बत है तुमसे,

क्या करे "रत्ती", बिना बोले रह सकता नहीं

मुझे बेवफा न समझो .....