Tuesday, May 20, 2008

काला मन

"काला मन"
मेरे मन के भीतर दो आंखों ने
झांकना शुरू किया
तो वो आश्चर्य चकित रह गयी

मन मन खुला का खुला रह गया
कितना गोरा है तन
उससे कई गुना ज्यादा काला है मन
कई जन्मों की धुलाई के बाद भी
असंभव सा लगता है कि वो सफेद होगा
नवीन लगेगा
मन के साथीयों से हुआ
आमना-सामना
इस मन के गुण और खूबियाँ बतलाऊं
सावधान हंसना मत ऐसा ही होता है मन

सुनो झूठ, फ़रेब, चोरी, मक्कारी, होशियारी,
चार सौ बीस, धोखेबाज
ये सब एक ही घर में डेरा डाले पडे़ रहते हैं
और मन इनका गुलाम
ये कुछ डरावनें लोग देखे
मेरे मन में
उन आंखों ने भयभीत हो मुख से निकल गया

हे! भगवान ऐसा होता है मन
हजार ऐबो से युक्त
सचमुच काला है
सचमुच काला है .....